31 Oct
31Oct

जब तक माँ का साया था, मै कभी नहीं घबराया था। 

उस के जाफे का लड्डू  , कोख में में मेने खाया था।

फंक मुझमे माँ ने प्राण, वर्ना में तो काय था। 

खो आधी रोटी, और रच कर स्वांग रचाया था। 

किस्से और कहावतों में, जीवन सार बताया था। 


Akash Jangra

Comments
* The email will not be published on the website.
I BUILT MY SITE FOR FREE USING