जब तक माँ का साया था, मै कभी नहीं घबराया था।
उस के जाफे का लड्डू , कोख में में मेने खाया था।
फंक मुझमे माँ ने प्राण, वर्ना में तो काय था।
खो आधी रोटी, और रच कर स्वांग रचाया था।
किस्से और कहावतों में, जीवन सार बताया था।
Akash Jangra