जब तक माँ का साया था, मै कभी नहीं घबराया था। उस के जाफे का लड्डू , कोख में में मेने खाया था। फंक मुझमे माँ ने प्राण, वर्ना में तो काय था। खो आधी रोटी, और रच कर स्वांग रचाया था। किस्से और कहावतों में, जीवन सार बताया था।
Read Moreबहुत हुआ ये सोना, बिना सोचे समझे बस मान जाना, कहता हे ये दौर, मुड के देखो अब चारो ओर कहती हे परिस्तिथि तुम्हे चिल्ला कर, आज उठो|| कब तक यह यूं ही रहेगा, कब तक इन्सान दबा रहेगा मर कर तो सबको जाना है वही, आज कुछ करो तो सही कहती हे परिस्तिथि तुम्हे चिल्ला कर, आज उठो|| आज उठो|| आज उठो|| Akash Jangra
Read Moreजीने की कला सिखाते शिक्षक ज्ञान की कीमत बताते शिक्षक पुस्तकों के होने से कुछ नहीं होता अगर मेहनत से नहीं पढ़ाते शिक्षक
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