11 Oct
11Oct

बहुत हुआ ये सोना, बिना सोचे समझे बस मान जाना,

कहता हे ये दौर, मुड के देखो अब चारो ओर

कहती हे परिस्तिथि तुम्हे चिल्ला कर, आज उठो||


कब तक यह यूं ही रहेगा, कब तक इन्सान दबा रहेगा

मर कर तो सबको जाना है वही, आज कुछ करो तो सही

कहती हे परिस्तिथि तुम्हे चिल्ला कर, आज उठो||

आज उठो|| आज उठो||

Akash Jangra

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