बहुत हुआ ये सोना, बिना सोचे समझे बस मान जाना, कहता हे ये दौर, मुड के देखो अब चारो ओर कहती हे परिस्तिथि तुम्हे चिल्ला कर, आज उठो|| कब तक यह यूं ही रहेगा, कब तक इन्सान दबा रहेगा मर कर तो सबको जाना है वही, आज कुछ करो तो सही कहती हे परिस्तिथि तुम्हे चिल्ला कर, आज उठो|| आज उठो|| आज उठो|| Akash Jangra
Read More


